How The Times Analyzed Location Tracking Companies
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By THE NEW YORK TIMES from NYT Technology https://www.nytimes.com/2018/12/10/technology/location-tracking-apps-privacy.html?partner=IFTTT
The New York Times December 10, 2018 at 05:30AM
Samsung Galaxy Z Fold3 स्मार्टफोन को S Pen सपोर्ट के साथ पेश किया जा सकता है। इसी दौरान Galaxy Z Flip3 स्मार्टफोन को लॉन्च किया जाएगा। Galaxy Z Flip3 कंपनी का पूरी तरह से फ्लैगशिप स्मार्टफोन नहीं होगा। जबकि Galaxy Z Fold3 कंपनी का बजट फ्लैगशिप स्मार्टफोन होगा। from Jagran Hindi News - technology:tech-news https://www.jagran.com/technology/tech-news-samsung-galaxy-flip3-and-galaxy-fold-3-to-be-launched-in-india-know-specifications-21345744.html Samsung Galaxy Z Fold3 स्मार्टफोन को S Pen सपोर्ट के साथ पेश किया जा सकता है। इसी दौरान Galaxy Z Flip3 स्मार्टफोन को लॉन्च किया जाएगा। Galaxy Z Flip3 कंपनी का पूरी तरह से फ्लैगशिप स्मार्टफोन नहीं होगा। जबकि Galaxy Z Fold3 कंपनी का बजट फ्लैगशिप स्मार्टफोन होगा। https://www.jagran.com/technology/tech-news-news-hindi.html
नई दिल्ली। अंतरिक्ष (space) में ग्रहों की चाल और वहां की पल-पल की खबर लेने के लिए कई देशों ने अपने सैटेलाइट भेज रख हैं। मगर यही सैटेलाइट (satellite) अब मुसीबत का सबब बन सकते हैं। दरअसल अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) के दो सैटेलाइट आपस में टकरा सकते हैं। इसके चलते नासा ने चेतावनी भी जारी की है। 3000 साल पुरानी ममी से आ रही थी गाने की आवाज, वैज्ञानिकों ने की रिकॉर्डिंग नासा के मुताबिक ये टक्कर (collide crash) 31 जनवरी यानि कल हो सकती है। भारतीय समयानुसार सैटेलाइट सुबह करीब 5 बजे आमने-सामने होंगे। अगर इन दोनों सैटेलाइट की टक्कर हुई तो अमेरिका के पिट्सबर्ग में इसका कचरा गिर सकता है। उस दौरान दोनों सैटेलाइट के बीच 50 से 100 फीट की दूरी हो सकती है। दोनों सैटेलाइट अब काम नहीं करते हैं। अंतरिक्ष में घूम रहे इन सैटेलाइट में एक का नाम जीजीएसई-4 (GGSE-4) है। वहीं दूसरे का नाम आईआरएएस (IRAS सैटेलाइट है। GGSE-4 को अमेरिका ने 1967 में लॉन्च किया था। यह अमेरिकी वायुसेना का जासूसी उपग्रह था। इसका वजन करीब 85 किलोग्राम है। यह अंतरिक्ष में 14.64 किलोमीटर प्रति सेकंड की गति से घूम रहा है। दूसरे...
भारतीय मूल की युवा साइंटिस्ट और इनोवेटर 14 वर्षीय गीतांजली राव ने एक ऐसा सेंसर (sensor) बनाया है जो आज की किसी भी मौजूदा आधुनिक तकनीक की तुलना में पानी में लेड यानी सीसे (Lead in drinking water) की मात्रा का सेकंड्स में पता लगा लेता है। सबसे अच्छी बात ये है कि इस उपकरण को बनाने के लिए उन्होंने बहुत महंगे डिवाइस का उपयोग नहीं किया है। उन्होंने लागत का ध्यान रखते हुए एक मोबाइल ऐप का उपयोग किया है जो उनके 'टेथिस' नाम के उपकरण को अधिक पोर्टेबल और उपयोग में आसान बनाता है। इसका मोबाइल जैसा डिजाइन इसे कहीं भी आसानी से लाने-ले जाने की सुविधा देता है अबौर कहीं भी पानी में लेड की मात्रा मापने में उपयोग किया जा सकता है। इसे बनाने का आइडिया उन्हें अपने माता-पिता को पीने के पानी में सीसा की मात्रा का परीक्षण करते हुए देखने के बाद आया था। उन्होंने देखा कि मौजूदा तकनीक सटीक जानकारी नहीं देतीं। बस यहीं से उन्हें ऐसा डिवाइस बनाने का विचार आया। गौरतलब है कि पूरे अमरीका में 5300 से भी ज्यादा पीने योग्य पानी के ऐसे जल स्रोत हैं जो लेड की प्रचुरता से दूषित हैं। अमरीका में लोगों के पास पानी में ल...
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