सील कमांडो और डॉक्टर के बाद अब बनेंगे अंतरिक्ष यात्री
इन्हीं में एक अंतरिक्ष होंगे 35 वर्षीय कैलिफोर्निया निवासी जॉनी किम। वे अमरीकी नेवी के सिल्वर मेडल विजेता सील कमांडो हैं। इतना ही नहीं उन्होंने हार्वर्ड विश्वविद्यालय से डॉक्टरी की पढ़ाई भी पूरी की है। अब वे एक ओर उपलब्धि अपने नाम करने जा रहे हैं। बीते सप्ताह नासा के अंतरिक्ष स्पेस स्टेशन, आर्टेमिस चंद्र मिशन और मंगल मिशन के लिए चुने गए 13 महिला-पुरुष अंतरिक्ष यात्रियों में वे कोरियाई मूल के पहले अमरीकी अंतरिक्ष यात्री होंगे। नेवी लेफ्टिनेंट जॉनी अमरीका में बसने वाली पहली कोरियाई पीढ़ी के प्रतिनिधि हैं। उनके माता-पिता बेहतर भविष्य की तलाश में दक्षिण कोरिया से लॉस एंजिल्स आ गए थे।
बुलीइंग ने बनाया सील कमांडो
स्कूल में बुलीइंग और नस्लभेदी टिप्पणियों से आहत जॉनी ने कमांडो बनने का फैसला किया और पढ़ाई खत्म करने के बाद वे सील कमांडो की कठिन ट्रेनिंग पास करने में भी सफल रहे। प्रशिक्षण की चुनौतियों से वे इस कदर टूट गए कि ट्रेनिंग छोडऩे का मन बना लिया। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया। उन्होंने मध्य पूर्व में अमरीका के लिए 100 से ज्यादा मिशनों पर कॉम्बैट चिकित्सक, स्नाइपर, नेविगेटर और प्वॉइंट मैन का दायित्व निभाया है। इस सेवा के लिए उन्हें नेवी के सैन्य सम्मान से भी नवाजा गया है।
ऐसे मिली डॉक्टर बनने की प्रेरणा
इराक में अपनी नियुक्ति के दौरान घायल और अपंग लोगों को देखकर उन्होंने निर्णय किया कि वे लोगों की मदद करने के लिए डॉक्टर बनेंगे। 2006 में जब उनके दो साथियों को इराक में एक आत्मघाती हमले में जान गंवानी पड़ी तो उन्होंने अपने इस इरादे को सच करने का पक्का इरादा कर लिया। अपने दोस्तों की जान न बचा पाने की पीड़ा ने उन्हें भीतर तक झंकझोर दिया। इसके 10 साल बाद वे 2016 में एक डॉक्टर के रूप में मैसाच्युसेट्स के एक अस्पताल में सेवा कर रहे थे। जॉनी को अंतरिक्ष यात्री बनने के लिए आए 18 हजार से ज्यादा आवेदकों में से चुना गया है।
चुने गए 13 अंतरिक्ष यात्रियों में 11 अमरीकी और 2 कनाडाई स्पेस एजेंसी के अंतरिक्ष यात्री हैं। अब तक ये लोग दो सालों की स्पेसवॉक, रोबोटिक्स, अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन सिस्टम, रूसी भाषा और जान बचाने की अन्य जरूरी ट्रेनिंग पूरी कर चुके हैं। आर्टिमिस कार्यक्रम के तहत 2024 तक दुनिया की पहली महिला अंतरिक्ष यात्री को चांद पर उतारने का महत्त्वकांक्षी मिशन है। इतना ही नहीं इन 13 में से कोई एक मंगल पर उतरने वाला पहला अंतरिक्ष यात्री भी बन सकता है।

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