Star Engineer Who Crossed Google Is Ordered to Pay $179 Million to Company
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By BY MIKE ISAAC from NYT Technology https://www.nytimes.com/2020/03/04/technology/anthony-levandowski-google-uber.html?partner=IFTTT
New York Times March 5, 2020 at 07:14AM
Samsung Galaxy Z Fold3 स्मार्टफोन को S Pen सपोर्ट के साथ पेश किया जा सकता है। इसी दौरान Galaxy Z Flip3 स्मार्टफोन को लॉन्च किया जाएगा। Galaxy Z Flip3 कंपनी का पूरी तरह से फ्लैगशिप स्मार्टफोन नहीं होगा। जबकि Galaxy Z Fold3 कंपनी का बजट फ्लैगशिप स्मार्टफोन होगा। from Jagran Hindi News - technology:tech-news https://www.jagran.com/technology/tech-news-samsung-galaxy-flip3-and-galaxy-fold-3-to-be-launched-in-india-know-specifications-21345744.html Samsung Galaxy Z Fold3 स्मार्टफोन को S Pen सपोर्ट के साथ पेश किया जा सकता है। इसी दौरान Galaxy Z Flip3 स्मार्टफोन को लॉन्च किया जाएगा। Galaxy Z Flip3 कंपनी का पूरी तरह से फ्लैगशिप स्मार्टफोन नहीं होगा। जबकि Galaxy Z Fold3 कंपनी का बजट फ्लैगशिप स्मार्टफोन होगा। https://www.jagran.com/technology/tech-news-news-hindi.html
भारतीय मूल की युवा साइंटिस्ट और इनोवेटर 14 वर्षीय गीतांजली राव ने एक ऐसा सेंसर (sensor) बनाया है जो आज की किसी भी मौजूदा आधुनिक तकनीक की तुलना में पानी में लेड यानी सीसे (Lead in drinking water) की मात्रा का सेकंड्स में पता लगा लेता है। सबसे अच्छी बात ये है कि इस उपकरण को बनाने के लिए उन्होंने बहुत महंगे डिवाइस का उपयोग नहीं किया है। उन्होंने लागत का ध्यान रखते हुए एक मोबाइल ऐप का उपयोग किया है जो उनके 'टेथिस' नाम के उपकरण को अधिक पोर्टेबल और उपयोग में आसान बनाता है। इसका मोबाइल जैसा डिजाइन इसे कहीं भी आसानी से लाने-ले जाने की सुविधा देता है अबौर कहीं भी पानी में लेड की मात्रा मापने में उपयोग किया जा सकता है। इसे बनाने का आइडिया उन्हें अपने माता-पिता को पीने के पानी में सीसा की मात्रा का परीक्षण करते हुए देखने के बाद आया था। उन्होंने देखा कि मौजूदा तकनीक सटीक जानकारी नहीं देतीं। बस यहीं से उन्हें ऐसा डिवाइस बनाने का विचार आया। गौरतलब है कि पूरे अमरीका में 5300 से भी ज्यादा पीने योग्य पानी के ऐसे जल स्रोत हैं जो लेड की प्रचुरता से दूषित हैं। अमरीका में लोगों के पास पानी में ल...
नई दिल्ली। भारत किसी वक्त सोने की चिड़िया कहलाता था। यहां सोने (gold) का अपार भंडार था। मगर क्या आपको पता है धरती पर मौजूद ये पीली धातु आई कहां से। जानकारों के मुताबिक ये चट्टानों से निकलती है। जबकि वैज्ञानिकों ने इस मसले पर एक नया दावा पेश किया है। उनके अनुसार धरती पर स्वर्ण उल्कापिंडों (meteorites) के जरिए पहुंचा है। सेकेंड हैंड सूटकेस ने खोली 50 वर्षीय शख्स की किस्मत, अंदर मिले 30 लाख रुपए इम्पीरियल कॉलेज, लंदन के भूगर्भशास्त्री मथिया विलबोल्ड का कहना है,'सिद्धांत यह है कि धरती के मुख्य हिस्से के गठन के बाद उल्का पिंडों की बौछार हुई जो धरती से टकराए। इन उल्का पिंडों में कुछ मात्रा में सोना था और इसने धरती के बाहरी सतह को सोने से भर दिया।' यह घटना करीब 3.8 अरब साल पहले घटी होगी। यहां मौजूद सोना धरती की संपत्ति नहीं है बल्कि ये उल्कापिंडों के जरिए आए हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार धरती (earth) की बाहरी सतह करीब 25 माइल मोटी है। इसमें हर 1000 टन धातुओं में केवल 1.3 ग्राम सोना था। सन 1970 के दशक में चंद्रमा (moon) पर अपोलो को भेजा गया था। इसमें वैज्ञानिकों ने चंद्रमा पर मौजूद च...
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